Mahasubhashita SangrahaAnushtubh
गौरवं प्राप्यते दानात् न तु वित्तस्य सञ्चयात् । स्थितिरुच्चैः पयोदानां पयोधीनामधः स्थितिः ॥
गौरवम्गौरव
प्राप्यतेप्राप्त होता है
दानात्दान देने से
ननहीं
तुकिन्तु
वित्तस्यधन का
सञ्चयात्संचय करने से
स्थितिःस्थिति
उच्चैःऊँचाई पर
पयोदानाम्वर्षा देने वाले बादलों का
पयोधीनाम्सागरों का
अधःनीचे
स्थितिःस्थिति
गौरव दान देने से प्राप्त होता है, धन संचय करने से नहीं। वर्षा देने वाले बादल ऊँचाई पर रहते हैं; जल संचय करने वाले सागर नीचे रहते हैं।
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