Chanakya NitiAnushtubh
कः कालः कानि मित्राणि को देशः कौ व्ययागमौ । कस्याहं का च मे शक्तिः इति चिन्त्यं मुहुर्मुहुः ॥
काल क्या है? मित्र कौन हैं? देश की स्थिति क्या है? व्यय और आय क्या है? मैं किसका हूँ, और मेरी शक्ति क्या है? — इन प्रश्नों पर बार-बार विचार करना चाहिए।
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