काममय एवायं पुरुष इति

काममय एवायं पुरुष इति । स यथाकामो भवति तत्क्रतुर्भवति । यत्क्रतुर्भवति तत्कर्म कुरुते । यत्कर्म कुरुते तदभिसम्पद्यते ॥

काममयःइच्छाओं से बना
क्रतुःसंकल्प
कर्मकर्म
अभिसम्पद्यतेगति पाता है

मनुष्य इच्छाओं से बना है। जैसी इच्छा, वैसा संकल्प। जैसा संकल्प, वैसा कर्म। जैसा कर्म, वैसी गति।

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