कर्मणैव हि

Bhagavad Gita3.20

कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः । लोकसंग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि ॥

कर्मणाकर्म द्वारा
एवही
हिनिश्चय ही
संसिद्धिम्सिद्धि
आस्थिताःप्राप्त किया
जनकादयःजनक आदि
लोकसंग्रहम्लोक-कल्याण
एवही
अपिभी
सम्पश्यन्देखते हुए
कर्तुम्करने के लिए
अर्हसितुम्हें चाहिए

जनक आदि ने कर्म द्वारा ही सिद्धि प्राप्त की थी। लोक-कल्याण को ध्यान में रखते हुए भी तुम्हें कर्म करना चाहिए।

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