कर्तव्यमाचरन् कामं

Yoga Vasishtha6.54

कर्तव्यमाचरन् कामं अकर्तव्यमनाचरन् । तिष्ठति प्राकृताचारो यः स आर्य इति स्मृतः ॥

कर्तव्यम्कर्तव्य
आचरन्पालन करता हुआ
अकर्तव्यम्अकर्तव्य
अनाचरन्न करता हुआ
प्राकृताचारःस्वाभाविक सदाचार
आर्यःआर्य
स्मृतःकहलाता है

जो कर्तव्य का इच्छापूर्वक पालन करता है, अकर्तव्य को नहीं करता, और अपने स्वाभाविक सदाचार में स्थित रहता है, वही आर्य कहलाता है।

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