Chanakya NitiAnushtubh
निर्विषेणापि सर्पेण कर्तव्या महती फणा । विषमस्तु न चाप्यस्तु फणाटोपो भयंकरः ॥
निर्विष सर्प को भी बड़ी फणा फैलानी चाहिए। विष हो अथवा न हो — फण का विस्तार ही भयंकर होता है।
appearancestrategysnakedisplay of power
निर्विषेणापि सर्पेण कर्तव्या महती फणा । विषमस्तु न चाप्यस्तु फणाटोपो भयंकरः ॥
निर्विष सर्प को भी बड़ी फणा फैलानी चाहिए। विष हो अथवा न हो — फण का विस्तार ही भयंकर होता है।
मुफ़्त। हर दिन एक श्लोक। कभी भी अनसब्सक्राइब करें।
हम केवल श्लोक भेजेंगे। कोई स्पैम नहीं, कोई साझा नहीं।