MahabharataAnushtubh
परैः परिभवे प्राप्ते वयं पञ्चोत्तरं शतम् । परस्परविरोधे तु वयं पञ्च शतं तु ते ॥
बाहरी शत्रु से अपमान होने पर हम एक सौ पाँच हैं। परन्तु आपस में लड़ें तो हम पाँच हैं और वे सौ।
unityconflict
परैः परिभवे प्राप्ते वयं पञ्चोत्तरं शतम् । परस्परविरोधे तु वयं पञ्च शतं तु ते ॥
बाहरी शत्रु से अपमान होने पर हम एक सौ पाँच हैं। परन्तु आपस में लड़ें तो हम पाँच हैं और वे सौ।
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