पथ्यमौषधसेवा च

Vivekachudamani53

पथ्यमौषधसेवा च क्रियते येन रोगिणा । आरोग्यसिद्धिर्दृष्टास्य नान्यानुष्ठितकर्मणा ॥

पथ्यम्उचित आहार
औषधम्औषधि
रोगिणारोगी द्वारा
आरोग्यसिद्धिःआरोग्य की प्राप्ति

जो रोगी उचित आहार और औषधि का सेवन करता है, वही आरोग्य प्राप्त करता है, किसी और के कर्म से नहीं।

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