पथ्यमौषधसेवा च क्रियते येन रोगिणा । आरोग्यसिद्धिर्दृष्टास्य नान्यानुष्ठितकर्मणा ॥
जो रोगी उचित आहार और औषधि का सेवन करता है, वही आरोग्य प्राप्त करता है — किसी और के कर्म से नहीं।
self-efforthealing
पथ्यमौषधसेवा च क्रियते येन रोगिणा । आरोग्यसिद्धिर्दृष्टास्य नान्यानुष्ठितकर्मणा ॥
जो रोगी उचित आहार और औषधि का सेवन करता है, वही आरोग्य प्राप्त करता है — किसी और के कर्म से नहीं।
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