संरोहत्यग्निना दग्धं वनं परशुना हतम् । वाचा दुरुक्तं बीभत्सं न संरोहति वाक्क्षतम् ॥
आग से जला या कुल्हाड़ी से कटा वन फिर उग आता है; परन्तु दुर्वचनों से दिया गया भयंकर वाक्-क्षत कभी नहीं भरता। (भीष्म का युधिष्ठिर को उपदेश)
ethicswisdomgriefrealism
संरोहत्यग्निना दग्धं वनं परशुना हतम् । वाचा दुरुक्तं बीभत्सं न संरोहति वाक्क्षतम् ॥
आग से जला या कुल्हाड़ी से कटा वन फिर उग आता है; परन्तु दुर्वचनों से दिया गया भयंकर वाक्-क्षत कभी नहीं भरता। (भीष्म का युधिष्ठिर को उपदेश)
मुफ़्त। हर दिन एक श्लोक। कभी भी अनसब्सक्राइब करें।
हम केवल श्लोक भेजेंगे। कोई स्पैम नहीं, कोई साझा नहीं।