उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम् । सोत्साहस्य हि लोकेषु न किञ्चिदपि दुर्लभम् ॥
हे आर्य! उत्साह ही सच्चा बल है। उत्साह से बड़ा कोई बल नहीं। उत्साही व्यक्ति के लिए इस संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं।
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उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम् । सोत्साहस्य हि लोकेषु न किञ्चिदपि दुर्लभम् ॥
हे आर्य! उत्साह ही सच्चा बल है। उत्साह से बड़ा कोई बल नहीं। उत्साही व्यक्ति के लिए इस संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं।
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