उत्साहो बलवानार्य

RamayanaKishkindha Kanda 4.1.121

उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम् । सोत्साहस्य हि लोकेषु न किञ्चिदपि दुर्लभम् ॥

उत्साहःउत्साह
बलवान्बलवान / सच्चा बल
आर्यहे आर्य
ननहीं
अस्तिहै
उत्साहात्उत्साह से
परम्बड़ा
बलम्बल
सोत्साहस्यउत्साही व्यक्ति के लिए
हिनिश्चय ही
लोकेषुलोकों में
ननहीं
किञ्चित्कुछ
अपिभी
दुर्लभम्दुर्लभ

हे आर्य! उत्साह ही सच्चा बल है। उत्साह से बड़ा कोई बल नहीं। उत्साही व्यक्ति के लिए इस संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं।

enthusiasmstrength

हर सुबह एक संस्कृत श्लोक, अर्थ सहित — अपने ईमेल पर।

मुफ़्त। हर दिन एक श्लोक। कभी भी अनसब्सक्राइब करें।

हम केवल श्लोक भेजेंगे। कोई स्पैम नहीं, कोई साझा नहीं।