यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः । तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसङ्गः समाचर ॥
यज्ञ के लिए किए कर्म के अतिरिक्त सारा कर्म बन्धनकारी है। इसलिए हे कुन्तीपुत्र! आसक्ति रहित होकर केवल यज्ञार्थ कर्म करो।
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यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबन्धनः । तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसङ्गः समाचर ॥
यज्ञ के लिए किए कर्म के अतिरिक्त सारा कर्म बन्धनकारी है। इसलिए हे कुन्तीपुत्र! आसक्ति रहित होकर केवल यज्ञार्थ कर्म करो।
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