यस्मिन्यथा वर्तते यो मनुष्यः

MahabharataUdyoga Parva 5.37.7

यस्मिन्यथा वर्तते यो मनुष्यः तस्मिंस्तथा वर्तितव्यं स धर्मः । मायाचारो मायया वर्तितव्यः साध्वाचारः साधुना प्रत्युदेयः ॥

यस्मिन्जिसके साथ
यथाजैसा
वर्ततेव्यवहार करता है
वर्तितव्यम्व्यवहार करना चाहिए
धर्मःधर्म
मायाचारःछल से व्यवहार करने वाला
माययाछल से
साध्वाचारःसाधु आचरण वाला
साधुनासाधुता से
प्रत्युदेयःपेश आना चाहिए

जो मनुष्य जिसके साथ जैसा व्यवहार करता है, उसके साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए। यही धर्म है। छल से व्यवहार करने वाले के साथ छल से, और साधु आचरण वाले के साथ साधुता से पेश आना चाहिए।

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