धैर्यं यस्य पिता क्षमा च जननी शान्तिश्चिरं

Subhashitam

धैर्यं यस्य पिता क्षमा च जननी शान्तिश्चिरं गेहिनी सत्यं सूनुरयं दया च भगिनी भ्राता मनःसंयमः । शय्या भूमितलं दिशोऽपि वसनं ज्ञानामृतं भोजनं एते यस्य कुटुम्बिनः वद सखे कस्माद्भयं योगिनः ॥

धैर्यम्धैर्य
क्षमाक्षमा
शान्तिःशान्ति
गेहिनीगृहिणी
सूनुःपुत्र
मनःसंयमःमनःसंयम
ज्ञानामृतम्ज्ञानामृत
योगिनःयोगी को

जिसके पिता धैर्य, माता क्षमा, गृहिणी शान्ति, पुत्र सत्य, बहन दया, भाई मनःसंयम; शय्या भूमि, वस्त्र दिशाएँ और भोजन ज्ञानामृत है, हे मित्र! ऐसे कुटुम्ब वाले योगी को किसका भय?

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