ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् । तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम् ॥
ईशाईश्वर से
वास्यम्व्याप्त / निवास योग्य
इदम्यह
सर्वम्सारा / सब कुछ
यत्जो भी
किम्कुछ
चऔर
जगत्याम्जगत में
जगत्जगत / चराचर
तेनउससे
त्यक्तेनत्याग की भावना से
भुञ्जीथाःभोग करो
मामत
गृधःलालच करो
कस्यस्वित्किसी का भी
धनम्धन
यह सारा संसार, जो कुछ भी इस गतिशील जगत में है, ईश्वर से व्याप्त है। त्याग की भावना से भोग करो; दूसरों के धन का लालच मत करो।
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