ज्येष्ठत्वं जन्मना नैव

Subhashitam

ज्येष्ठत्वं जन्मना नैव गुणैर्ज्येष्ठत्वमुच्यते । गुणात् गुरुत्वमायाति दुग्धं दधि घृतं क्रमात् ॥

ज्येष्ठत्वम्श्रेष्ठता
जन्मनाजन्म से
गुणैःगुणों से
दुग्धम्दूध
दधिदही
घृतम्घी

श्रेष्ठता जन्म से नहीं आती; गुणों से श्रेष्ठता कही जाती है। गुणों से गरिमा बढ़ती है, जैसे दूध दही बनता है, फिर घी।

meritcharacter

हर सुबह एक संस्कृत श्लोक, अर्थ सहित — अपने ईमेल पर।

मुफ़्त। हर दिन एक श्लोक। कभी भी अनसब्सक्राइब करें।

हम केवल श्लोक भेजेंगे। कोई स्पैम नहीं, कोई साझा नहीं।