शान्तितुल्यं तपो नास्ति

Subhashitam

शान्तितुल्यं तपो नास्ति तोषान्न परमं सुखम् । नास्ति तृष्णापरो व्याधिर्न च धर्मो दयापरः ॥

शान्तिःशान्ति
तपःतप
तोषात्सन्तोष से
तृष्णातृष्णा
दयादया

शान्ति के तुल्य तप नहीं, सन्तोष से परम सुख नहीं। तृष्णा से बड़ा रोग नहीं और दया से बड़ा धर्म नहीं।

peacesatisfactiondharmamercy

हर सुबह एक संस्कृत श्लोक, अर्थ सहित — अपने ईमेल पर।

मुफ़्त। हर दिन एक श्लोक। कभी भी अनसब्सक्राइब करें।

हम केवल श्लोक भेजेंगे। कोई स्पैम नहीं, कोई साझा नहीं।