एको धर्मः परं श्रेयः

MahabharataUdyoga Parva 5.33.48 (Vidura Niti)

एको धर्मः परं श्रेयः क्षमैका शान्तिरुत्तमा । विद्यैका परमा दृष्टि- रहिंसैका सुखावहा ॥

एकःएक ही
धर्मःधर्म
परम्परम
श्रेयःकल्याण
क्षमाक्षमा
एकाएक ही
शान्तिःशान्ति
उत्तमाउत्तम / सर्वश्रेष्ठ
विद्याविद्या
परमासर्वश्रेष्ठ
दृष्टिःदृष्टि / अन्तर्दृष्टि
अहिंसाअहिंसा
सुखावहासुख देने वाली

एक धर्म ही परम कल्याण है, एक क्षमा ही उत्तम शान्ति है। एक विद्या ही सर्वश्रेष्ठ दृष्टि है, और एक अहिंसा ही सुख देने वाली है।

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