आदानस्य प्रदानस्य

Subhashitam

आदानस्य प्रदानस्य कर्तव्यस्य च कर्मणः । क्षिप्रमक्रियमाणस्य कालः पिबति तद्रसम् ॥

आदानस्यलेने का
प्रदानस्यदेने का
कर्तव्यस्यकर्तव्य का
चऔर
कर्मणःकर्म का
क्षिप्रम्शीघ्र
अक्रियमाणस्यन किए जाने पर
कालःकाल
पिबतिपी लेता है
तत्उसका
रसम्सार

लेन-देन, दान और कर्तव्य, इन्हें शीघ्र पूरा न किया जाए तो काल स्वयं उनका सार पी लेता है।

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