समानी व आकूतिः

Rigveda10.191.4

समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः । समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति ॥

समानीएक जैसी
वःतुम्हारा
आकूतिःसंकल्प
समानाएक जैसे
हृदयानिहृदय
वःतुम्हारे
समानम्एक जैसा
अस्तुहो
वःतुम्हारा
मनःमन
यथाजिससे
वःतुम्हारा
सुसहासतिभली प्रकार एक साथ रहे

तुम्हारे संकल्प एक हों, तुम्हारे हृदय एक हों, तुम्हारे मन एक ही प्रकार से सोचें, जिससे तुम्हारी सामूहिक शक्ति बढ़े।

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