सर्पदुर्जनयोर्मध्ये

Subhashitam

सर्पदुर्जनयोर्मध्ये वरं सर्पो न दुर्जनः । सर्पः दंशति कालेन दुर्जनस्तु पदे पदे ॥

सर्पःसर्प
दंशतिदंशता है
पदे पदेपद-पद पर

सर्प और दुर्जन में सर्प श्रेष्ठ है, दुर्जन नहीं। सर्प कभी-कभी दंशता है, दुर्जन पद-पद पर पीड़ा देता है।

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