विना प्रीतिं विना नीतिं

Subhashitam

विना प्रीतिं विना नीतिं विना सत्कार्यपद्धतिम् । विना कर्तृत्वशक्तिं च संघो नैव विवर्धते ॥

प्रीतिम्प्रेम
नीतिम्नीति
कर्तृत्वशक्तिम्कर्तृत्व शक्ति
संघःसंगठन

बिना प्रेम, बिना नीति, बिना सही कार्यपद्धति, और बिना कर्तृत्व शक्ति के, कोई संगठन कभी नहीं बढ़ सकता।

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